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19.06.2026 10:49 AM
19 जून के लिए EUR/USD का ट्रेडिंग विश्लेषण और सिफारिशें — डॉलर में तेज़ी जारी

EUR/USD 5-मिनट (5M) टाइमफ्रेम विश्लेषण

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EUR/USD मुद्रा जोड़ी बुधवार को तेज़ी से गिरती रही, जो अमेरिकी डॉलर की उल्लेखनीय मजबूती को दर्शाता है। सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। डॉलर में अचानक और मजबूत तेजी का कारण क्या है?

हाँ, फेडरल रिज़र्व की बैठक के नतीजे अधिक "hawkish" रहे, और मौद्रिक समिति ने साल के अंत तक दरें बढ़ाने की तैयारी जताई है ताकि उच्च मुद्रास्फीति से निपटा जा सके। हालांकि फेड ने अभी तक दरें नहीं बढ़ाई हैं, जबकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) ने पिछले सप्ताह ही दरें बढ़ा दी थीं। इसके बावजूद बाजार ने ECB के फैसलों को अनदेखा कर दिया, जबकि संभावित फेड दर वृद्धि को पिछले दो दिनों से पहले ही कीमतों में शामिल कर लिया गया है।

इसके अलावा, गुरुवार को अमेरिका या यूरोपीय संघ में कोई बड़ा आर्थिक डेटा या रिपोर्ट जारी नहीं हुई। ईरान में भू-राजनीतिक संघर्ष भी समाप्ति की ओर है और तेल की कीमतें गिर रही हैं, जिससे जोखिम से बचने (risk-off) की जरूरत भी कम हो गई है। ऐसे में सवाल यह है कि डॉलर क्यों बढ़ रहा है?

हमारी राय में इसका कोई स्पष्ट मौलिक कारण नहीं है। डॉलर इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि मार्केट मेकर्स इसे खरीद रहे हैं। यह EUR/USD में बेयरिश ट्रेडर्स के लिए एक संभावित "ट्रैप" भी हो सकता है।

तकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो बुधवार और गुरुवार को यूरो में आई गिरावट ने डाउनट्रेंड को फिर से सक्रिय कर दिया है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि FOMC बैठकें हर छह हफ्ते में होती हैं और बाजार अधिकांश मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स को नजरअंदाज करता रहा है। इसलिए बुधवार को डॉलर की तेजी तर्कसंगत थी, लेकिन गुरुवार को यह उतनी स्पष्ट नहीं थी।

हम मानते हैं कि डॉलर ने अपने "luck phase" का पूरा फायदा उठाया है। फिलहाल कोई प्रमुख विश्लेषक भी डॉलर में आगे मजबूत तेजी का स्पष्ट अनुमान नहीं दे रहा है।

5-मिनट टाइमफ्रेम पर गुरुवार को उच्च वोलैटिलिटी के बावजूद कोई स्पष्ट ट्रेडिंग सिग्नल नहीं बना। यूरोपीय ट्रेडिंग सेशन में कीमत 1.1536–1.1542 के क्षेत्र को ठीक से टेस्ट करने से थोड़ा पीछे रह गई।

COT रिपोर्ट

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नवीनतम COT रिपोर्ट 9 जून की है। साप्ताहिक टाइमफ्रेम पर दिए गए चित्र से स्पष्ट है कि नॉन-कमर्शियल ट्रेडर्स की नेट पोजीशन अभी भी "बुलिश" बनी हुई है, लेकिन भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण इसमें काफी गिरावट आई है। पिछले कुछ महीनों में ट्रेडर्स यूरो को बेचकर अमेरिकी डॉलर की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। ट्रंप की नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कुछ समय के लिए डॉलर ने "रिज़र्व करेंसी" की तरह व्यवहार किया है। हालांकि, यह प्रक्रिया अब शायद समाप्त हो चुकी है।

फिलहाल हमें ऐसे कोई मजबूत फंडामेंटल फैक्टर्स नहीं दिख रहे जो यूरो की मजबूती को सपोर्ट करें, जबकि डॉलर में गिरावट के पर्याप्त कारण मौजूद हैं। मध्य पूर्व का युद्ध डॉलर को अस्थायी रूप से बहुत आकर्षक बना रहा था, लेकिन जैसे ही यह फैक्टर अपने "एक्सपायरी" चरण में पहुंचेगा, स्थिति सामान्य हो सकती है। और यह बदलाव शायद पहले ही शुरू हो चुका है।

लंबी अवधि में EUR/USD 1.08 (ट्रेंडलाइन स्तर) तक गिर सकता है, लेकिन समग्र अपट्रेंड अभी भी प्रासंगिक बना रहेगा। पिछले कुछ महीनों में यह जोड़ी इस स्तर के करीब भी नहीं पहुंची है।

इंडिकेटर में लाल और नीली लाइनों की व्यवस्था यह दर्शाती है कि बुल्स और बियर्स के बीच संतुलन की स्थिति है। पिछले रिपोर्टिंग सप्ताह में "नॉन-कमर्शियल" ग्रुप में लॉन्ग पोजीशन 15,900 कम हुईं, जबकि शॉर्ट पोजीशन 19,000 बढ़ीं। इसके परिणामस्वरूप नेट पोजीशन में 34,900 कॉन्ट्रैक्ट्स की गिरावट दर्ज की गई।

EUR/USD 1H विश्लेषण

EUR/USD 1 घंटे (1H) टाइमफ्रेम पर बाजार फिलहाल रेंज और शॉर्ट-टर्म दबाव के बीच ट्रेड कर रहा है। कोई मजबूत ट्रेंड अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इंट्राडे में सेलिंग प्रेशर अधिक दिख रहा है।

  • यदि कीमत 1.0850 के नीचे टिकती है, तो गिरावट तेज हो सकती है
  • 1.0880–1.0900 रेंज रेजिस्टेंस ज़ोन की तरह काम कर सकती है
  • ब्रेकआउट के बिना बाजार में कंसोलिडेशन जारी रहने की संभावना है

निष्कर्ष:
1H चार्ट पर EUR/USD फिलहाल अनिश्चितता और हल्के बेयरिश झुकाव के साथ ट्रेड कर रहा है, इसलिए ट्रेडर्स को कन्फर्मेशन के बिना आक्रामक एंट्री से बचना चाहिए।

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घंटे (Hourly) टाइमफ्रेम पर अपट्रेंड रद्द हो चुका है, जबकि डाउनट्रेंड के जारी रहने पर भी अब सवाल उठ रहे हैं। मध्य पूर्व की स्थिति अब सामान्य हो चुकी है, जिसका मतलब है कि डॉलर अब भू-राजनीतिक समर्थन पर निर्भर नहीं कर सकता। फेड ने बुधवार को अमेरिकी डॉलर को मजबूत सपोर्ट दिया था, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि गुरुवार को गिरावट क्यों जारी रही। बाजार अभी भी बिना स्पष्ट कारण के डॉलर खरीद रहा है और यूरो को सपोर्ट देने वाले फैक्टर्स को नजरअंदाज कर रहा है।

19 जून के लिए ट्रेडिंग लेवल्स:

1.1362, 1.1426, 1.1536–1.1542, 1.1585, 1.1657–1.1666, 1.1750–1.1760, 1.1786, 1.1830–1.1837, 1.1907–1.1922, साथ ही Ichimoku इंडिकेटर की Senkou Span B लाइन (1.1578) और Kijun-sen लाइन (1.1550)।

Ichimoku की ये लाइनें दिन के दौरान बदल सकती हैं, इसलिए ट्रेडिंग सिग्नल बनाते समय इसे ध्यान में रखना जरूरी है। अगर कीमत सही दिशा में 15 पिप्स चलती है, तो ब्रेकईवन पर स्टॉप-लॉस लगाना न भूलें। इससे गलत सिग्नल की स्थिति में नुकसान से बचाव होगा।

शुक्रवार को EU और अमेरिका में कोई बड़ा आर्थिक डेटा या रिपोर्ट जारी नहीं होगी। EUR/USD में लगातार दो दिनों की गिरावट के बाद शायद एक ठहराव (pause) देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह भी संभव है कि बाजार सिर्फ मोमेंटम (inertia) के आधार पर आगे भी सेलिंग जारी रखे।

हम मानते हैं कि डॉलर की मौजूदा मजबूती के पीछे कोई बहुत मजबूत कारण नहीं है।

ट्रेडिंग सिफारिशें:

आज ट्रेडर्स 1.1444 के स्तर को ब्रेक करने पर शॉर्ट पोजीशन खोल सकते हैं, जिसका लक्ष्य 1.1362 होगा।
वहीं, यदि कीमत 1.1444 से रिबाउंड करती है, तो 1.1536–1.1542 तक के लक्ष्य के साथ लॉन्ग पोजीशन ली जा सकती है।

चित्रों की व्याख्या:

  • मोटी लाल रेखाएँ: सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर (यह संभावित रिवर्सल क्षेत्र दिखाते हैं, सिग्नल नहीं)
  • Ichimoku की Kijun-sen और Senkou Span B: मजबूत तकनीकी स्तर
  • पतली लाल रेखाएँ: पुराने रिवर्सल लेवल (ट्रेडिंग सिग्नल स्रोत)
  • पीली रेखाएँ: ट्रेंड लाइन, चैनल और तकनीकी पैटर्न
  • COT चार्ट का इंडिकेटर 1: ट्रेडर्स की नेट पोजीशन का आकार दर्शाता है

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