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EUR/USD ने शुक्रवार को एक मजबूत गिरावट (powerful decline) का अनुभव किया, जो केवल एक घटना से शुरू हुई थी — Non-Farm Payrolls रिपोर्ट।
इस रिपोर्ट के बारे में पहले ही काफी चर्चा हो चुकी है, इसलिए उसे दोहराने की आवश्यकता नहीं है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि Non-Farm के अलावा वेतन (wage) और बेरोजगारी (unemployment) के आंकड़े भी जारी किए गए थे, लेकिन वे बाजार के लिए खास प्रभावशाली नहीं रहे। बेरोजगारी के आंकड़े अनुमान के अनुसार ही आए। इसलिए बाजार ने लगभग पूरी तरह ध्यान केवल Non-Farm Payrolls पर केंद्रित किया, और वह भी इसलिए क्योंकि इसके आंकड़े काफी मजबूत और प्रभावशाली थे।
इस तरह तीन सप्ताह से चल रहा साइडवेज़ (flat) मूवमेंट समाप्त हो गया है, और अब यह समझना जरूरी है कि क्या आगे भी गिरावट जारी रहेगी। चूंकि भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है और ईरान तथा अमेरिका के बीच समझौता नहीं हो पा रहा है, इसलिए डॉलर की आगे और मजबूती की संभावना बनी हुई है। साथ ही यदि वर्ष के अंत तक Federal Reserve द्वारा मौद्रिक नीति सख्त की जाती है, तो डॉलर को और समर्थन मिल सकता है।
हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि डॉलर को सपोर्ट करने वाले ये केवल दो कारक हैं, जबकि कई अन्य कारक इसके खिलाफ भी काम कर रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषण यह संकेत देता है कि डाउनट्रेंड फिर से शुरू हो सकता है, लेकिन यह आगे जारी रहेगा या नहीं — यह अभी भी बड़ा सवाल है।
5M चार्ट पर शुक्रवार को तीन ट्रेडिंग सिग्नल बने:
इस तरह ट्रेडर्स एक short position लेकर अच्छा मुनाफा कमा सकते थे।
(COT रिपोर्ट का उल्लेख यहां बाजार में पोजीशनिंग और बड़े खिलाड़ियों की स्थिति को समझने के लिए किया जाता है।)
EUR/USD के लिए नवीनतम COT रिपोर्ट 2 जून की तारीख की है।
साप्ताहिक टाइमफ्रेम पर दिए गए चित्र से यह स्पष्ट होता है कि गैर-वाणिज्यिक ट्रेडर्स (Non-commercial traders) की नेट पोजीशन अभी भी "बुलिश" बनी हुई है, लेकिन भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण इसमें काफी गिरावट आई है।
पिछले कुछ महीनों में ट्रेडर्स ने यूरो को बेचकर अमेरिकी डॉलर को प्राथमिकता दी है। Donald Trump की नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कुछ समय के लिए डॉलर को "रिज़र्व करेंसी" के रूप में काफी सपोर्ट मिला है। हालांकि यह प्रक्रिया अब अपने अंत के करीब हो सकती है।
हम अभी भी ऐसा कोई मजबूत फंडामेंटल कारण नहीं देख रहे हैं जो यूरो को मजबूत कर सके, लेकिन अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने वाले कई कारण मौजूद हैं।
मध्य पूर्व में युद्ध ने डॉलर को अस्थायी रूप से बहुत आकर्षक बना दिया था, लेकिन जैसे-जैसे यह फैक्टर "समाप्ति चरण" में पहुंच रहा है, स्थिति फिर सामान्य हो सकती है। संभव है कि यह प्रभाव पहले ही खत्म हो चुका हो।
लंबी अवधि में EUR/USD $1.08 (trend line support) तक गिर सकता है, लेकिन समग्र अपट्रेंड अभी भी बरकरार रहेगा। पिछले कुछ महीनों में कीमत इस ट्रेंडलाइन के बहुत करीब नहीं आई है।
इंडिकेटर की रेड और ब्लू लाइनों से यह संकेत मिलता है कि बुल्स और बियर्स के बीच संतुलन (parity) बना हुआ है।
पिछले रिपोर्टिंग सप्ताह में:
EUR/USD में फिलहाल बाजार संतुलन की स्थिति में है, जहां न तो स्पष्ट बुलिश कंट्रोल है और न ही बियरिश। अगले कदम मुख्य रूप से भू-राजनीतिक घटनाओं और डॉलर की मांग पर निर्भर करेंगे।
(1 घंटे के टाइमफ्रेम पर विश्लेषण अगली स्टेप में विस्तार से देखा जाएगा)
EUR/USD के लिए 1 घंटे (hourly timeframe) पर विश्लेषण में यह देखा गया है कि जोड़ी ने फिर से अपना डाउनवर्ड ट्रेंड (गिरावट का रुझान) शुरू कर दिया है।
मध्य पूर्व की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थिति न तो और खराब हो रही है और न ही बेहतर। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच किसी शुरुआती समझौते की संभावना फिलहाल केवल एक उम्मीद मात्र लगती है। यदि भविष्य में मध्य पूर्व में युद्ध के नए संकेत नहीं मिलते और वास्तव में कोई समझौता (memorandum) होता है, तो अमेरिकी डॉलर कमजोर होना शुरू हो सकता है। लेकिन फिलहाल न तो कोई समझौता दिख रहा है और न ही युद्ध में कोई बड़ा बदलाव।
इसके अलावा:
Ichimoku Indicator की ये लाइनें दिन के दौरान बदल सकती हैं, इसलिए ट्रेडिंग सिग्नल निकालते समय इन्हें ध्यान में रखना जरूरी है।
यदि कीमत सही दिशा में 15 पिप्स तक चलती है, तो Stop Loss को breakeven पर ले जाना चाहिए, ताकि गलत सिग्नल होने पर नुकसान से बचा जा सके।
सोमवार को यूरोज़ोन और अमेरिका से कोई महत्वपूर्ण आर्थिक डेटा या इवेंट नहीं है। इसलिए बाजार में कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं होगी और दिन संभवतः साइडवेज़ या हल्का करेक्शन वाला हो सकता है।