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कल अमेरिकी शेयर बाज़ार के प्रमुख सूचकांकों में तेज़ी देखने को मिली।
आज एशियाई शेयर बाज़ारों में गिरावट देखने को मिली, जिसमें एक बार फिर प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) सेक्टर बिकवाली का मुख्य केंद्र रहा। MSCI Asia Pacific Index कारोबार के दौरान अधिकतम 2.2% तक गिर गया, हालांकि बाद में निचले स्तरों पर खरीदारी आने से नुकसान घटकर लगभग 1.5% रह गया। टेक शेयरों में आई इस नई गिरावट ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी तेज़ी शायद जरूरत से ज़्यादा आगे निकल चुकी है।
Samsung निवेशकों के ध्यान का केंद्र रहा, क्योंकि उसके नतीजों ने बाज़ार की बदलती सोच को उजागर किया। कंपनी ने डेटा सेंटरों में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की मजबूत मांग के कारण मुनाफे में 19 गुना वृद्धि दर्ज की। इसके बावजूद कंपनी का शेयर लगभग 10% गिर गया। इसकी वजह यह रही कि कंपनी का मुनाफा विश्लेषकों के अनुमान से केवल 6% ही अधिक रहा। साथ ही, इस वर्ष अब तक शेयर की कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी थी, इसलिए निवेशकों की उम्मीदें इससे भी अधिक थीं। यह गिरावट दर्शाती है कि बाज़ार अब AI उद्योग के अगले चरण का नए सिरे से मूल्यांकन कर रहा है।
तकनीक को लेकर उत्साह अभी भी बरकरार है, लेकिन निवेशकों का ध्यान अब एक महत्वपूर्ण सवाल पर केंद्रित हो गया है—क्या पूंजीगत खर्च (Capex) में बढ़ोतरी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उत्पादन क्षमता के विस्तार से इतना मुनाफा कमाया जा सकेगा कि मौजूदा ऊँचे मूल्यांकन (Valuation) को उचित ठहराया जा सके? पहले जिन खबरों को बाज़ार नज़रअंदाज़ कर देता था—जैसे उत्पादन क्षमता का विस्तार, परियोजनाओं में देरी और बढ़ता कर्ज़—अब वही बिकवाली की वजह बन रही हैं। फिलहाल सबसे प्रमुख रुझान यह है कि निवेशक अत्यधिक महंगे हो चुके टेक शेयरों से पैसा निकालकर अन्य सेक्टरों में निवेश कर रहे हैं।
दूसरी ओर, वैश्विक बाज़ारों में रिस्क-ऑफ माहौल देखने को मिला और तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम का प्रीमियम फिर से जुड़ गया। ब्रेंट क्रूड लगभग 1.2% बढ़कर 72.85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। इसकी वजह यह रही कि ओमान के तट के पास होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे गैस से भरे एक जहाज़ पर हमला हुआ। इस घटना ने जून के अंत में हुए नाज़ुक युद्धविराम पर फिर सवाल खड़े कर दिए और बाज़ार को याद दिलाया कि क्षेत्रीय भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
इस बीच, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 3 बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.50% हो गई। डॉलर में हल्की मजबूती आने के कारण सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन गिरकर लगभग 4,125 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। वहीं, जापानी येन भी डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत होकर लगभग 161.81 येन प्रति डॉलर पर पहुँच गया, जबकि हेज फंड्स वर्ष 2007 के बाद से इस मुद्रा पर अपनी सबसे अधिक मंदी (बेयरिश) वाली पोज़िशन बनाए हुए हैं।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, दैनिक चार्ट पर खरीदारों (बुल्स) के सामने सबसे बड़ी चुनौती 7,518 के प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस) स्तर को पार करना है। यदि यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो तेजी की पुष्टि होगी और सूचकांक के 7,544 तक बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।
इसके बाद यदि खरीदार 7,574 के ऊपर अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो बाज़ार में उनकी स्थिति और अधिक मजबूत हो जाएगी।
वहीं, गिरावट की स्थिति में खरीदारों के लिए 7,494 का स्तर बचाना बेहद महत्वपूर्ण होगा। यदि यह समर्थन (सपोर्ट) स्तर टूट जाता है, तो सूचकांक के 7,474 तक फिसलने की संभावना बढ़ जाएगी और इसके बाद 7,451 का स्तर अगला प्रमुख लक्ष्य बन सकता है।